डॉ.राजबहादुर सिंह के निधन से पूरे पवस्त में शोक की लहर

 


 ग्राम सहिजदपुर बरहता जमदग्निपुरम(जौनपुर )के निवासी डॉक्टर राजबहादुर सिंह का आज सुबह आकस्मिक निधन हो गया|जिसका समाचार सुनते ही पूरा पवस्त अचम्भित शोक के सागर में डूब गया|डॉक्टर साहब अपने घर के रक्षक तो थे ही,साथ पूरे पवस्त के रक्षक थे|आस पास के लगभग 5 किलोमीटर तक के गाँव वासी उन्ही को अपना सबकुछ मानते थे|मानते भी क्यों नहीं|सबकी सेवा हेतु वे सदैव तत्पर रहते थे|कोई आधी रात को बीमार पड़ गया डॉक्टर साहब बिना डरे|बिना भोर का इंतजार किए पहुँच जाते थे|दवा का पैसा मिलेगा कि नहीं इसकी परवाह कभी नहीं किए|दवा देकर बिना फीस माँगे चले आते थे| जो दिया उससे लिए, जो नहीं दिया उससे कभी माँगे भी नहीं|ऐसे थे हमारे पवस्त के सबके प्रिय डॉक्टर राजबहादुर सिंह|
      स्वास्थ्य तो सबका ठीक करते ही थे,गाड़ियों की भी छोटी मोटी बीमारी सही कर देते थे|साथ में संगीत प्रेमी भी थे|संगीत के इतने प्रेमी थे कि हारमोनियम खरीद कर हारमोनियम सीखे|भजन गीत अखंड रामायण हो या सुन्दरकांड का पाठ हर जगह समय निकाल कर पहुँच ही जाते थे|कोई बहाना नहीं|जबकी बहाने उनके पास अनगिनत थे|खेल कूद में भी रुचि रखते थे|रुचि ही नहीं संसाधनों की भी व्यवस्था करते थे|जिससे वे सबके सदैव चहेते बने रहे|
    भरे पुरे परिवार में जन्मे अपने भाइयों में सबसे बड़े थे|उम्र लगभग 50 बसंत ही देखे थे|उनकी पत्नी पहले ही स्वर्गवासी हो चुकी हैं|एक बेटा और दो बेटी के पिता थे|आज सुबह जुखाम से पीड़ित होने की वजह से भाप ले रहे थे|उसी दौरान उनकी साँस टूट गई और वे हम सभी को शोक के सागर में रोता बिलखता डूबोकर चले गये|गाँव पुर पवस्त तो शोकित अचम्भित हुआ ही है|महानगरों में भी रहने वाले उनको चाहने वाले सबके सब शोकित और विस्मित हैं|सब यही सोंच रहे कि ए क्या हो गया|मन मानने को तैयार नहीं|उनका यूँ हम सबको छोड़ के जाना असहनीय है|ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान कर अपनी शरण में लें|भावभीनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि पूरे पुर की तरफ से|उनकी याद में,उनको समर्पित ये चंद लाइने-

पुर का सूर्य अस्त हो गया

दिन हो चाहे रात चाहे  हो बरसात|
चाहे तपती धूप हो चाहे शर्द हो रात||
सुख हो दुख हो चाहे हो पुर में कोई बात|
चीर थपेड़े लू की जाते पहुँच बलात||

डॉक्टर को कहते सभी रक्षक औ भगवान|
सच में राजबहादुर थे ममपुर के भगवान||
आज अनाथ हो गया नाथ विहीन पवस्त|
डॉक्टर साहब के जाने से सूर्य हो गया अस्त||

थे पवस्त के गार्जियन सबका देते साथ|
काम कोई भी हो उसमें सदा बँटाते हाँथ||
आज बिलखता छोड़ गये गया न कोई साथ|
द्रवित सभी  झटका लगा सभी मसलते हाँथ||

बहते आँसू नयन से झरझर ज्यूँ बरसात|
विह्वल विकल पवस्त है दिन में हो गई रात||
प्रकृति के आगे चली नहीं किसी की आज विसात|
असहनीय दुख दे गया रात के बाद प्रभात||

स्व.डॉक्टर राजबहादुर सिंह को समर्पित शब्दांजलि
पं.जमदग्निपुरी





Comments

  1. Replies
    1. डॉक्टर साहब का जाना बहुत ही दुखद हुआ हम सबके बहुत प्यार सबके दुःख हरने वाले आज अचानक हम सब को छोड़कर चले गए भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे ।

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