IMMA के 6वें नेशनल क्रॉप न्यूट्रिशन समिट और बी टू बी एक्सपो 2026 में खेती को आसान बनाने, मिट्टी की सेहत और 'वन नेशन वन लाइसेंस‘ पर खास चर्चा

 


मुंबई।इंडियन माइक्रो फर्टिलाइजर्स मैन्युफैक्चर्स असोसिएशन (IMMA) ने 5 और 6 फरवरी 2026 को मुंबई के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में अपना 6वां नेशनल क्रॉप न्यूट्रिशन समिट और बी टू बी एक्सपो सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, स्टार्टअप और कृषि-इनपुट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने मिलकर भारत की खेती के भविष्य, किसानों की ज़रूरतों और कृषि उद्योग से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की।

इस सम्मेलन की थीम “Converge, Collaborate & Co-create” रही, जिसका उद्देश्य सरकार, उद्योग और वैज्ञानिकों को एक मंच पर लाकर मिलकर समाधान निकालना था। कार्यक्रम का उद्घाटन महाराष्ट्र सरकार के मंत्री जयकुमार जितेंद्रसिंह रावल ने किया। भारत सरकार के डॉ. पी. के. सिंह, एग्रिकल्चर कमिश्नर इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में डॉ. पी. के. सिंह ने कहा कि भारत की कृषि की असली ताकत मिट्टी, पौधे और किसान हैं। यदि मिट्टी स्वस्थ होगी तो फसल भी बेहतर होगी और किसान की आय बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि बैलेंस्ड न्यूट्रिशियन और इंटीग्रेटेड न्यूट्रिट मैनेजमेंट से खेती की लागत कम होती है, उत्पादन बढ़ता है और ज़मीन की गुणवत्ता बनी रहती है। सरकार विजन 2047 के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए उद्योग के व्यावहारिक सुझावों पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री जयकुमार जितेंद्रसिंह रावल ने कहा कि माइक्रो फर्टिलाइजर्स और न्यूट्रिट इंडस्ट्री ने पिछले कई दशकों में किसानों की पैदावार और फसल की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने ज़ोर दिया कि किसानों, बीज उद्योग, उर्वरक और पोषक तत्व निर्माताओं को मिलकर एक साथ काम करना होगा। सरकार MSME आधारित उद्योगों को पूरा सहयोग दे रही है।

सम्मेलन का एक प्रमुख मुद्दा रहा “One Nation, One License”। उद्योग की ओर से मांग की गई कि पूरे देश के लिए एक समान लाइसेंस प्रणाली लागू की जाए, जिससे अलग-अलग राज्यों में बार-बार लाइसेंस लेने की परेशानी खत्म हो सके। इसके लिए एक सेंट्रलाइज्ड लाइसेंसिंग डाटा सिस्टम बनाने का सुझाव दिया गया, जिससे इस ऑफ डूइंग बिजनेस बेहतर हो। इसके अलावा Micro-nutrients, Biologicals और Specialty Fertilizers के लिए मंज़ूरी की प्रक्रिया तेज़ करने, नकली और घटिया कृषि उत्पादों पर सख्त कार्रवाई करने तथा निर्यात को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।

इस समिट में पहली बार "मीडिया स्पीकर्स" नाम से एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस सत्र में पत्रकारों ने उद्योग को सीधा फीडबैक दिया और किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने, प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ाने और सफलता की सच्ची कहानियों को सामने लाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

IMMA ने इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रोग्रेसिव फॉर्मर्स को उनकी फसल-विशेष उपलब्धियों और नवाचार के लिए सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान IMMA Pitch Party का आयोजन भी किया गया, जिसमें 16 नए और एग्री इनपुट प्रोडक्ट उन्नत प्रस्तुत किए गए। इससे नई कंपनियों और स्टार्टअप्स को उद्योग से जुड़ने और साझेदारी के अवसर मिले।

IMMA के प्रेसिडेंट डॉ. राहुल मीरचंदानी ने कहा कि इस समिट का एक महत्वपूर्ण परिणाम सरकार के साथ मिलकर वन नेशन वन लाइसेंस को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाना है। उन्होंने यह भी बताया कि IMMA ने ICAR के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे उद्योग को तकनीकी जानकारी और रिसर्च का लाभ मिलेगा।

इस समिट में पॉलिसी डायलॉग, गवर्नमेंट इंडस्ट्री मीटिंग, स्टार्ट अप पिच सेशन, बी टू बी मीटिंग और टेक्निकल सेशन आयोजित किए गए, जिससे IMMA की भूमिका कृषि उद्योग की एक मज़बूत आवाज़ के रूप में और सशक्त हुई।

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